• April 2, 2025

Success Story: सरकारी योजनाओं से आत्मनिर्भरता की ओर, आशीष गौतम की बहु-उद्यमी सफलता की कहानी

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हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के पच्छाद तहसील के चमोदा गांव के रहने वाले आशीष गौतम ने मेहनत और सरकारी योजनाओं के सही इस्तेमाल से अपनी तकदीर बदल दी है। उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए कृषि, बागवानी, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन में सफलता हासिल की और खुद को आत्मनिर्भर बनाया। उनकी यह यात्रा न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कर किस तरह से आर्थिक रूप से सशक्त हुआ जा सकता है।

आशीष ने साल 2023 में अपने सपनों को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया और 500 वर्ग मीटर का ग्रीनहाउस स्थापित किया। इस परियोजना में उन्हें बागवानी विभाग से 8.42 लाख रुपये की सब्सिडी मिली, जिससे उन्होंने अपनी खेती की शुरुआत की। मार्च 2023 में, उन्होंने ग्रीनहाउस में 2,500 लाल और पीली शिमला मिर्च के पौधे लगाए, जिनसे करीब पांच टन की उपज हुई। बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिली, जिससे उन्हें लगभग 7 लाख रुपये की कमाई हुई। इसके बाद उन्होंने उसी ग्रीनहाउस में खीरे की खेती शुरू की, जिससे उनकी आय में 2 लाख रुपये और जुड़ गए। इसके अलावा, उन्होंने फ्लोरीकल्चर रिवोल्यूशन स्कीम का लाभ उठाते हुए 500 लैवेंडर के पौधे लगाए। लैवेंडर से निकाले गए तेल और अर्क की बाजार में भारी मांग रहती है, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी हुई।

खेती के अलावा आशीष ने पशुपालन के क्षेत्र में भी कदम रखा। उन्होंने मुर्गी पालन शुरू किया और पशुपालन विभाग से 10 रुपये प्रति चूजे की दर से 50 चूजे प्राप्त किए। उन्होंने मुर्गी पालन से अंडे और मुर्गियों की बिक्री कर लगभग 50,000 रुपये की आय अर्जित की। खास बात यह रही कि उन्होंने इस प्रक्रिया से निकलने वाले कचरे का इस्तेमाल अपने मत्स्य पालन में किया, जिससे उनकी आय के नए रास्ते खुले।

आशीष ने मत्स्य पालन में भी अपनी मेहनत और सरकारी सहायता का बेहतरीन उपयोग किया। उन्होंने दो बड़े जलाशय बनाए, जिनमें से एक की क्षमता 1.5 लाख लीटर और दूसरे की 60,000 लीटर थी। मत्स्य विभाग ने उन्हें 1 रुपये प्रति बीज की दर से 5,000 मछली के बीज उपलब्ध कराए। इसके परिणामस्वरूप, जून-जुलाई 2024 में उन्होंने एक टन मछली का उत्पादन किया और इससे 1 लाख रुपये की कमाई की।

इसके अलावा, उन्होंने मधुमक्खी पालन में भी हाथ आजमाया और इसमें शानदार सफलता पाई। साल 2023 में, उन्हें 48 मधुमक्खी बक्सों के लिए 1.36 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। उन्होंने 2024 तक 1.5 टन शहद का उत्पादन किया और इसे ऑनलाइन तथा क्वागधर में स्थित शी-हाट के माध्यम से बेचा। इससे उन्हें 5 लाख रुपये की कमाई हुई।

आशीष गौतम की यह कहानी साबित करती है कि यदि सही दिशा में मेहनत की जाए और सरकारी योजनाओं का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि हासिल करना संभव है। उनके प्रयास न केवल ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, बल्कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की सफलता का भी एक जीवंत उदाहरण हैं।

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