• April 4, 2025

PMMY: देश की इकोनॉमी में बढ़ रही महिलाओं की भागीदारी, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से मिला बड़ा फायदा

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प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत देशभर में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। एसबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, 52 करोड़ खाताधारकों में से 68 प्रतिशत महिला उद्यमी हैं, जिससे पिछले 10 वर्षों में महिलाओं की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2016 से वित्त वर्ष 2025 तक प्रति महिला मुद्रा ऋण वितरण राशि 13 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर 62,679 रुपये हो गई, जबकि वृद्धिशील जमा राशि 14 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़कर 95,269 रुपये तक पहुंच गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएमएमवाई ने उद्यमशीलता से वंचित सामाजिक समूहों को वित्तीय सहायता देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 52 करोड़ पीएमएमवाई खातों में लगभग आधे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के हैं। महिला उद्यमियों की संख्या सबसे अधिक बिहार में 4.2 करोड़ है, इसके बाद तमिलनाडु में 4.0 करोड़ और पश्चिम बंगाल में 3.7 करोड़ महिला उद्यमी हैं। महाराष्ट्र में कुल महिला खाताधारकों की हिस्सेदारी 79 प्रतिशत है, जबकि झारखंड में 75 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 73 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की गई है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2025 तक इस योजना के तहत 33.19 लाख करोड़ रुपये के 52.07 करोड़ लोन स्वीकृत किए जा चुके हैं। मुद्रा योजना के तहत माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंसिंग एजेंसी (मुद्रा) की स्थापना की गई थी, जिससे छोटे उद्यमों को 20 लाख रुपये तक का कोलेटरल फ्री लोन मिल सके।

एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, शिशु ऋण की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2016 में 93 प्रतिशत थी, जो 2025 तक घटकर 51.7 प्रतिशत रह गई, जबकि किशोर ऋण की हिस्सेदारी 5.9 प्रतिशत से बढ़कर 44.7 प्रतिशत हो गई है। इससे पता चलता है कि छोटे कारोबार अब बड़े स्तर पर पहुंच रहे हैं और एमएसएमई इकाइयां सशक्त हो रही हैं। मुद्रा योजना के जरिए देशभर में महिला सशक्तिकरण को एक नई दिशा मिली है, जिससे अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

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