• May 19, 2024

बारिश के बीच होटलों के ध्वस्तीकरण का काम जारी, आवासीय मकान का पुश्ता ढहा

 बारिश के बीच होटलों के ध्वस्तीकरण का काम जारी, आवासीय मकान का पुश्ता ढहा
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जोशीमठ में दोपहर को मौसम बदला और हल्की बारिश शुरू हो गई। वहीं, होटल माउंट व्यू और मलारी इन के ध्वस्तीकरण का काम जारी है। वहीं, भू-धंसाव के कारण लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस के पिछले हिस्से में एक आवासीय भवन के आंगन का पुश्ता ढह गया जिससे मकान को खतरा हो गया है।

भूस्खलन की चपेट में आए मकान में पहले से ही चारों तरफ से दरारें पड़ी हैं, अब भूस्खलन होने से भवन को खतरा हो गया है। भवन स्वामी चंडी प्रसाद बहुगुणा ने बताया कि मंगलवार को घर में कोई नहीं था और सुबह अचानक आंगन का पुश्ता ढह गया। सीबीआरआई की टीम ने मकान पर असुरक्षित का स्टीकर भी चस्पा कर दिया है।

उधर, जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति का आंदोलन भी नहीं थम रहा। आपदा प्रभावितों के लिए एचडीआरआई के पास उद्यान विभाग की भूमि पर केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रूड़की के सहयोग प्री-फेब्रीकेटेड भवनों को निर्माण शुरू कर दिया गया है।

सचिव आपदा प्रबंधन ने बताया कि यहां वन बीएचके, टू बीएचके व थ्री बीएचके के मॉडल प्रोटोटाइप प्री-फ्रेब्रिकेटेड पांच भवनों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा ढाक गांव में 10 हेक्टेयर भूमि पर मॉडल प्री-फेब्रीकेटेड घरों के निर्माण के लिए भूमि का चयन होने के बाद भूमि समतलीकरण बिजली, पानी, सीवर आदि की व्यवस्थाओं पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। यह एक निजी कंपनी की ओर से 100 वन बीएचके, टू बीएचके व थ्री बीएचके के मॉडल प्रोटोटाइप प्रीफ्रेब्रिकेटेड भवन बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कई दूसरी कंपनियों ने भी इसमें रूचि दिखाई है, जो अपने निजी खर्च पर ऐसे भवन बनाकर देना चाहती है। इनमें आगे की बातचीत की जा रही है। उन्होंने बताया कि अभी तक 15 भवन सीबीआरआई और 100 भवन एक निजी कंपनी की ओर से बनाए जाने हैं।
मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि एवं बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने ढाक गांव पहुंचकर वहां प्रभावितों के लिए प्री-फ्रेबिकेटेड हट्स बनाने के लिए चिह्नित भूमि का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय महिलाओं से भी बातचीत की। महिलाओं ने कहा कि प्रशासन की ओर से उन्हें विश्वास में लिए बगैर यहां प्री-फ्रेबिकेटेड हट्स बनाए जा रहे हैं। इस पर बीकेटीसी अध्यक्ष ने उन्हें आश्वस्त किया कि स्थानीय लोगों के हितों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। इन विषम परिस्थितियों में हम सभी को मिलकर एक-दूसरे का सहयोग करना होगा। इधर, मुख्य विकास अधिकारी एलएन मिश्रा ने बताया कि प्रभावितों के अस्थायी व स्थायी पुनर्वास के लिए जहां भी जगह चिह्नित की जा रही हैं वहां के लोगों के साथ बातचीत की जा रही है।
जेपी कॉलोनी में हो रहे पानी के रिसाव की मात्रा में लगातार उतार-चढ़ाव दर्ज किया जा रहा है। पानी की मात्रा 180 एलपीएम दर्ज की गई, जबकि एक दिन पहले यह 136 एलपीएम पर था। वहीं भवनों में नई दरारें दर्ज नहीं की गई हैं। सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत सिन्हा ने बताया कि 6 जनवरी को पानी का डिस्चार्ज 540 एलपीएम था, तब से इसकी मात्रा में लगातार उतार-चढ़ाव दर्ज किया जा रहा है। पानी के स्रोत और इसकी स्थिति पर अभी तकनीकी रिपोर्ट आनी बाकी है, तभी इस बारे में विस्तृत रूप से कुछ कहा जा सकेगा। फिलहाल पानी के रिसाव पर नजर रखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि दरार वाले भवनों में क्रेको मीटर लगाए गए थे। इनमें शुरुआत में दरारों में बढोतरी दर्ज की गई थी, लेकिन अब दरारें स्थिर हैं। सीबीआरआई का कहना है कि जमीन अब स्थिर हो रही है। यह शुभ संकेत है। उन्होंने बताया कि पानी के कुछ बड़े टैंकों में दरारें आईं थी, जिन्हें पहले ही खाली कराने के निर्देश दे दिए गए थे।
सचिव ने बताया कि जोशीमठ आपदा प्रभावित 261 परिवारों को अब तक अग्रिम राहत के तौर पर 3 करोड़ 45 लाख रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि 278 परिवार सुरक्षा के दृष्टिगत अस्थायी रूप से विस्थापित किए गए हैं। विस्थापित परिवार के सदस्यों की संख्या 933 है। इसके अलावा 10वीं के 395 और 12वीं के 514 बच्चों की पढ़ाई में बोर्ड परीक्षाओं से पहले कोई व्यवधान न पड़े, इसका भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
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