Uttarakhand: यूसीसी लागू होने से हलाला, बहुविवाह और तीन तलाक पर पूरी तरह से रोक लगेगी: सीएम धामी
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उत्तराखंड में कानून व्यवस्था और विकास कार्यों को लेकर कई बातों का जिक्र किया है। उत्तराखंड सरकार के तीन साल पूरे होने पर उन्होंने जनता का आभार भी जताया। टाइम्स नाउ समिट 2025 में बात करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य की स्थापना के बाद पहली बार साल 2022 में आम चुनाव हुए, जिनमें एक मिथक टूटा और परिपाटी बदली। उत्तराखंड में हर पांच साल बाद चुनाव होने पर सरकार बदलने की परंपरा चली आ रही थी, लेकिन साल 2022 में पहली बार ऐसा हुआ कि उत्तराखंड में भाजपा की सरकार की वापसी हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आम चुनाव में गए और उत्तराखंड की जनता ने पांच साल में सरकार बदलने वाला मिथक तोड़ दिया। साल 2022 के चुनाव में उत्तराखंड की जनता ने परिपाटी बदलकर इतिहास बना दिया। राज्य में भाजपा की सरकार पहले से थी और जनता ने फिर से भाजपा को सरकार बनाने का मौका दिया। भाजपा सरकार ने भी उत्तराखंड की देवभूमि की जनता की उम्मीदों के अनुसार कई ऐसे काम किए, जो पहले ही हो जाने चाहिए थे। उन कामों को आगे बढ़ाया गया और कुछ पर ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि दुनियाभर के लोग चाहते हैं कि देवभूमि का मूल स्वरूप बना रहे, क्योंकि उत्तराखंड आस्था का प्रतीक है। गंगा, आदि कैलाश, चारधाम और पर्वतमालाओं का प्रदेश है।
उत्तराखंड का 71 फीसदी भूभाग जंगलों से ढका है। सरकार ने जल, जीवन और पर्यावरण समेत हर दिशा में काम किया है। उत्तराखंड का विशेष महत्व हमेशा से रहा है। यह ऋषियों, आयुर्वेद और योग की भूमि है। हम उसका स्वरूप और पवित्रता बनाए रखने का काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड बहुत शांत प्रदेश है। यहां सभी लोग आपसी भाईचारे, मेल-मिलाप और प्रेमपूर्वक रहते हैं। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड की जनता से यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने का वादा किया गया था। कहा गया था कि सरकार बनते ही सबसे पहले काम यूसीसी लाने का होगा। सरकार ने अपना वादा निभाया और 27 जनवरी 2025 से उत्तराखंड भारत का पहला राज्य बन गया है, जिसमें यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू हुआ है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रदेश में यूसीसी लागू करने के बाद कोई चुनौतियां नहीं हैं। कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं और तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं। देश की 50 फीसदी आबादी यानी महिलाओं की 100 फीसदी सुरक्षा का कानून यूसीसी है। लिव इन रिलेशनशिप को लेकर उन्होंने कहा कि यह हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है। माननीय उच्चतम न्यायालय में कई बार ऐसे प्रकरण आए हैं। हम लोकतांत्रिक मूल्यों पर चलने वाले हैं, इसलिए लिव इन रिलेशनशिप पर एक प्रावधान किया गया है कि अब कोई भी लिव इन रिलेशनशिप में रहता है तो उसके माता-पिता को इसकी जानकारी दी जाएगी और उनका कोई न कोई रिकॉर्ड रखा जाएगा। कई बार यह देखने में आया है कि संबंध अच्छे रहते हैं तो लोग लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगते हैं, फिर संबंध खराब हो जाते हैं। जब संबंध खराब होते हैं तो आपस में झगड़ा और मारपीट होने लगती है, हिंसक गतिविधियां होने लगती हैं और कई मामलों में हत्याएं हुई हैं। दिल्ली जैसी जगहों में शवों को काटकर सूटकेस और फ्रीज में रखने के मामले सामने आए हैं। ऐसे मामलों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने यूसीसी में लोगों की सुरक्षा का प्रावधान रखा है।
पूरे राज्य में एक साथ यूसीसी लागू करना बड़ी प्रक्रिया थी। उत्तराखंड में नई सरकार का गठन होते ही ड्राफ्ट कमेटी का गठन किया गया और ड्राफ्ट कमेटी ने दो लाख 36 हजार लोगों से अलग-अलग प्रकार से संपर्क किया। सबके विचार लिए गए। राजनीतिक दलों के लोगों से भी मुलाकात हुई और धार्मिक संगठनों से भी बात की गई। समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करके जस्टिस रंजना प्रसाद देसाई की अध्यक्षता वाली कमेटी ने ड्राफ्ट को सरकार के पास भेजा। उत्तराखंड की भाजपा सरकार उसे विधेयक के रूप में लेकर आई। राष्ट्रपति की भी मंजूरी मिली और उसके बाद वह कानून बना। उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड को पूरी दुनिया के लोग आस्था से देखते हैं। देवभूमि को लेकर हर किसी के मन में अलग तरह की आस्था है। देवों के नजदीक भूमि, अच्छे लोग, परिवेश और संस्कारों की भूमि है। यह सब खराब नहीं होना चाहिए और मूल स्वरूप बचा रहना चाहिए।
अनेक स्थानों पर अवैध रूप से मजारें बनी हुई थीं। कई जगहों पर वन विभाग, कृषि भूमि और राजस्व विभाग की सरकारी जमीन पर मजार बना दी गई थी। यह एक तरह से अतिक्रमण था, जो किसी भी कीमत पर सही नहीं है। कहीं पर नीली, तो कहीं पर पीली और हरी चादर चढ़ाकर मजार बनाई गई, जिसे एक तरह से लैंड जिहाद कहते हैं। कई जगहों पर देखा गया कि ऐसी मजारों को हटाया गया तो उनके नीचे कोई अवशेष नहीं मिले। कानून के दायरे में रहकर ऐसी मजार हटाने का काम किया गया। पहले कहा गया कि यह अतिक्रमण है और इसे खुद ही हटा लिया जाए। जब लोगों ने नहीं हटाया तो सरकार ने हटाना शुरू किया और अभी तक 6 हजार एकड़ जमीन अतिक्रमण मुक्त कराई जा चुकी है। यह अभियान अभी रुकने वाला नहीं है। अगर मदरसों की बात करें तो वे भी अवैध थे। इनमें पढ़ने वालों की पहचान छिपाई जा रही थी। संदिग्ध लोग भी उनमें किसी न किसी रूप में निवास कर रहे थे। सभी जिलाधिकारियों और पुलिस के माध्यम से ऐसे लोगों की खोजबीन शुरू की गई। जहां-जहां भी अवैध मदरसे पाए गए, उन्हें सील किया गया और बंद किया गया, ताकि देवभूमि की पवित्रता बनी रहे। अवैध अतिक्रमण हटाना किसी समुदाय विशेष के खिलाफ की गई कार्रवाई नहीं है। उत्तराखंड में किसी को टारगेट करके काम करने जैसा माहौल नहीं है। उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विधानसभा में एक रोज सुनने को मिला कि उत्तराखंड में इस तरह की कार्रवाई की शुरुआत एनडी तिवाड़ी सरकार के कार्यकाल में हुई थी। हम भी यही कह रहे हैं कि हमारे प्रेरणास्रोत रहे एनडी तिवाड़ी के कामों को ही हम आगे बढ़ा रहे हैं। जो काम उनके कार्यकाल या बाद की सरकारों ने नहीं किए, वे काम भी धामी सरकार को करने हैं।