Uttarakhand Medical Education: धामी सरकार में चिकित्सा शिक्षा को मिला नया आयाम, मेडिकल एजुकेशन का हब बन रहा उत्तराखंड
Uttarakhand Medical Education: धामी सरकार में चिकित्सा शिक्षा को मिला नया आयाम, मेडिकल एजुकेशन का हब बन रहा उत्तराखंड
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। कभी सीमित संसाधनों वाला यह पर्वतीय प्रदेश अब मेडिकल एजुकेशन का उभरता हुआ हब बन चुका है। मुख्यमंत्री के दूरदर्शी मार्गदर्शन और स्वास्थ्य विभाग की सतत मेहनत ने इस क्षेत्र को नई दिशा और मजबूती दी है। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाए, ताकि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं अपने ही प्रदेश में मिल सकें।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि रुद्रपुर और पिथौरागढ़ में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। उनका कहना है कि सरकार का ध्यान न केवल चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने पर है, बल्कि मेडिकल शिक्षा को भी वैश्विक स्तर तक सुदृढ़ बनाना है।
वर्ष 2000 में जब उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ, तब चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में राज्य लगभग शून्य स्थिति में था। वर्षों तक यहां कोई सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं था और युवाओं को डॉक्टर बनने के लिए अन्य राज्यों की ओर रुख करना पड़ता था। लेकिन अब, मात्र 25 वर्षों में उत्तराखंड ने इस क्षेत्र में ऐसी छलांग लगाई है जो पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है।
वर्तमान में उत्तराखंड में पांच सरकारी और चार निजी मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। इनमें श्रीनगर (गढ़वाल), हल्द्वानी, देहरादून, अल्मोड़ा और हरिद्वार के सरकारी कॉलेज चिकित्सा शिक्षा के केंद्र बन चुके हैं। इन संस्थानों में हर वर्ष लगभग 625 एमबीबीएस छात्रों को प्रवेश दिया जाता है और 238 से अधिक पोस्टग्रेजुएट सीटें उपलब्ध हैं। राज्य गठन के समय यह संख्या शून्य थी, जिससे यह प्रगति ऐतिहासिक मानी जा रही है।
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान, श्रीनगर में 150 एमबीबीएस और 51 पीजी सीटें हैं, जबकि हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में 125 एमबीबीएस और 69 पीजी सीटें उपलब्ध हैं। देहरादून के दून मेडिकल कॉलेज में 150 एमबीबीएस और 70 पीजी सीटें हैं। वहीं, अल्मोड़ा और हरिद्वार में 100-100 एमबीबीएस सीटें शुरू की गई हैं। इन सबके साथ राज्य में अब कुल 1325 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं, जो पहले की तुलना में लगभग 130 प्रतिशत वृद्धि दर्शाती हैं।
निजी क्षेत्र भी चिकित्सा शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। देहरादून के हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज में 250-250 एमबीबीएस सीटें हैं। इसके अतिरिक्त ग्राफिक एरा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और गौतम बुद्ध मेडिकल कॉलेज में 150-150 सीटें हैं। इस प्रकार सरकारी और निजी संस्थानों को मिलाकर राज्य में चिकित्सा शिक्षा का आधार पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुका है।
सरकार ने न केवल नई इमारतें और संस्थान बनाए हैं, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में मानव संसाधन को भी सशक्त किया है। मार्च 2025 में मुख्यमंत्री धामी ने 1,232 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। पिछले तीन वर्षों में स्वास्थ्य विभाग ने 173 सहायक प्रोफेसर, 56 वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य और 185 तकनीकी कर्मचारियों की नियुक्ति की है। इससे प्रदेश में 22,000 से अधिक नई सरकारी नौकरियाँ सृजित हुई हैं। विभाग का लक्ष्य प्रत्येक कॉलेज में पर्याप्त शिक्षकों और स्टाफ की नियुक्ति सुनिश्चित करना है ताकि शिक्षा की गुणवत्ता पर कोई असर न पड़े।
नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में भी राज्य ने बड़ी प्रगति की है। वर्तमान में 12 सरकारी और 80 से अधिक निजी नर्सिंग संस्थान संचालित हैं, जिनमें 4,700 बी.एससी. नर्सिंग, 463 एम.एससी. नर्सिंग और 4,000 से अधिक सहयोगी स्वास्थ्य पाठ्यक्रमों की सीटें उपलब्ध हैं। पैरामेडिकल शिक्षा में निजी संस्थानों द्वारा 12,000 से अधिक सीटें उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे हजारों युवाओं को रोजगारोन्मुख शिक्षा मिल रही है।
मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं को दुर्गम इलाकों तक पहुंचाने के लिए हेली-एंबुलेंस सेवा जैसी अभिनव पहलें शुरू की गई हैं। राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की पहुँच अब पहले से अधिक आसान हो गई है। रुद्रपुर और पिथौरागढ़ में नए मेडिकल कॉलेजों का निर्माण भी जारी है, जिससे “हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज” का सपना अब साकार होता नजर आ रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड को चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बनाने के लिए सरकार ने ठोस और दूरगामी कदम उठाए हैं। हमारी प्राथमिकता है कि राज्य के हर जिले में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं ताकि युवाओं को बाहर न जाना पड़े और प्रदेश आत्मनिर्भर बने। उन्होंने कहा कि नर्सिंग और पैरामेडिकल संस्थानों के विस्तार के साथ राज्य पूरे उत्तर भारत में उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने वाला अग्रणी प्रदेश बनेगा।