International Geeta Festival: कुरुक्षेत्र में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का सशक्त संदेश
International Geeta Festival: कुरुक्षेत्र में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का सशक्त संदेश
कुरुक्षेत्र, हरियाणा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यह महोत्सव अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गीता के शाश्वत संदेश को फैलाने का माध्यम बन चुका है। उन्होंने कुरुक्षेत्र की पावन भूमि को प्रणाम करते हुए कहा कि यही वह धर्मक्षेत्र है जहां योगेश्वर कृष्ण ने अर्जुन को दिव्य उपदेश दिए थे, जो आज मानवता के लिए मार्गदर्शन का स्त्रोत हैं।
धामी ने मंच पर उपस्थित पूज्य ज्ञानानंद महाराज, शंकराचार्य, जैन समाज के प्रमुख लोकेश मोनी और अन्य संतों का सम्मान करते हुए उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि गीता महोत्सव के माध्यम से न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश फैल रहे हैं, बल्कि नई पीढ़ी को जीवन के हर क्षेत्र में सही मार्गदर्शन प्रदान करने का कार्य भी किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने गीता के 700 श्लोकों को मानव जीवन की नैतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक दिशा देने वाला दिव्य प्रकाश पुंज बताया। उन्होंने अमेरिकी वैज्ञानिक जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि गीता के श्लोकों ने उन्हें परमाणु बम के परीक्षण के समय मानसिक स्थिरता दी और सही निर्णय लेने में मदद की।
धामी ने यह भी कहा कि गीता हर व्यक्ति के जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने और निष्काम भाव से कर्म करने की प्रेरणा देती है। चाहे वह व्यापार, सामाजिक क्षेत्र या कृषि क्षेत्र हो, गीता के उपदेश हर परिस्थिति में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उन्होंने अभिमन्यु के साहस और महाभारत की विभिन्न घटनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि गीता में निहित संदेश आज भी हमारे जीवन और समाज के लिए प्रासंगिक हैं।
मुख्यमंत्री ने अपनी व्यक्तिगत जीवन यात्रा में गीता के महत्व पर भी प्रकाश डाला और बताया कि उनके जीवन में हर निर्णय और कर्म में गीता के उपदेश मार्गदर्शक के रूप में कार्य करते हैं। उन्होंने लोक कल्याण और निष्काम भाव से राष्ट्र और मानवता के लिए कार्य करने का संदेश दोहराया।
धामी ने उत्तराखंड में किए गए कार्यों का जिक्र करते हुए बताया कि वहां धार्मिक स्थलों और मंदिरों को सजाने के साथ-साथ यमुना तीर्थ सर्किट के निर्माण, ऋषिकेश-हरिद्वार कॉरिडोर और हिंदू स्टडीज सेंटर की स्थापना का काम भी किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में जिहादी और विभाजनकारी मानसिकताओं पर अंकुश लगाने के लिए कठोर कानून लागू किए गए हैं और अवैध मदरसों को बंद किया गया है।
मुख्यमंत्री ने नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और सनातन परंपरा से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि ऐसे महोत्सवों के माध्यम से युवा पीढ़ी को धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित कराना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी संतों और धर्माचार्यों से आग्रह किया कि वे सनातन संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए एकजुट होकर काम करें।
अंत में पुष्कर सिंह धामी ने 2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ मेले में संतों और धर्माचार्यों के सहभागिता का अनुरोध किया और सभी को पुण्य का भागी बनाने के लिए आशीर्वाद देने की बात कही। उन्होंने विश्वास जताया कि इस पावन संकल्प को पूरा करने में संतों का आशीर्वाद हमेशा उनकी सरकार और राज्यवासियों के साथ रहेगा।