Geeta Mahotsav Kurukshetra: Address by Chief Minister Pushkar Singh Dhami at the International Geeta Mahotsav: Geeta is the eternal direction of humanity and the basis of life
Geeta Mahotsav Kurukshetra: अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संबोधन, गीता मानवता की शाश्वत दिशा और जीवन का आधार
कुरुक्षेत्र, हरियाणा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में आज उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया और धर्मभूमि कुरुक्षेत्र को मानवता की आध्यात्मिक धरोहर बताते हुए अपने उद्बोधन में गीता के वैश्विक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसी पवित्र भूमि पर भगवान कृष्ण ने अर्जुन को जो दिव्य ज्ञान प्रदान किया था, वही आज श्रीमद्भगवद्गीता के रूप में पूरी मानव सभ्यता को मार्गदर्शन दे रहा है और सत्य, कर्तव्य तथा धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कुरुक्षेत्र से प्रवाहित संदेश केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सार्वभौमिक जीवन दर्शन है, जिसमें निष्काम कर्म, आत्मोन्नति, न्याय, सत्य और समर्पण जैसे उच्च आदर्श निहित हैं। उन्होंने हरियाणा सरकार और स्वामी ज्ञानानंद महाराज के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि इस भव्य आयोजन के माध्यम से गीता का शाश्वत संदेश जन-जन तक पहुँच रहा है और विश्व के मंच पर भारतीय आध्यात्मिकता की प्रतिष्ठा निरंतर बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन की अद्वितीय मार्गदर्शिका है। इसमें मनुष्य के विचार, व्यवहार, कर्तव्य, भक्ति और ज्ञान का सर्वोत्तम सार समाहित है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वे बचपन से ही गीता के उपदेशों का अनुसरण करते आए हैं और अपने प्रत्येक निर्णय तथा जीवन के हर मोड़ पर गीता को मार्गदर्शक मानते हैं। उनके अनुसार, समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए निष्काम भाव से किया गया कार्य ही सर्वोच्च धर्म है, और यह संदेश आज पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत बन चुका है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि गीता के महत्व को ध्यान में रखते हुए उत्तराखण्ड सरकार ने राज्य के सभी विद्यालयों में प्रतिदिन गीता के श्लोकों का पाठ अनिवार्य किया है, ताकि नई पीढ़ी नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना से समृद्ध हो सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपनी सांस्कृतिक पहचान के पुनर्जागरण के अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है और हमारी गौरवशाली विरासत आज राष्ट्रीय चेतना का आधार बन रही है।
देवभूमि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक महत्ता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह भूमि आस्था, विश्वास और भारतीय संस्कृति का केंद्र है। राज्य सरकार ने सांस्कृतिक और सामाजिक आधार को सुरक्षित रखने के लिए जबरन धर्मांतरण के विरुद्ध कठोर कानून लागू किया है, दंगारोधी कानून बनाया है और 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। उन्होंने गर्व से कहा कि देश में सबसे पहले उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू कर सभी नागरिकों के लिए समान कानून की स्थापना की गई है।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, अवधेशानन्द महाराज, कुमार ऋषि, जैन समाज के प्रतिनिधि, स्वामी लोकेश मुनि, बाबा भूपेंद्र, कपिल पुरी महाराज तथा अनेक संतगण उपस्थित रहे।