Uttarakhand: मानसून सत्र की शुरुआत में थराली की पूर्व विधायक मुन्नी देवी को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि
Uttarakhand: मानसून सत्र की शुरुआत में थराली की पूर्व विधायक मुन्नी देवी को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि
देहरादून/भराड़ीसैंण: उत्तराखण्ड विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन थराली की पूर्व विधायक स्वर्गीय मुन्नी देवी की स्मृतियों को समर्पित रहा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सदन में उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि मुन्नी देवी का जीवन हमेशा जनसेवा की ललक और समर्पण से भरा रहा।
मुख्यमंत्री ने अपने भावुक संबोधन में वर्ष 2021 की उस भीषण आपदा का उल्लेख किया, जिसने नारायणबगड़ के डुंगरी गांव को हिला कर रख दिया था। उन्होंने बताया कि उस आपदा में दो लोगों की मृत्यु हो गई थी। वे तत्कालीन कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और डॉ. धन सिंह रावत के साथ मौके पर पहुंचे थे। उस समय सतपाल महाराज को स्थानीय लोगों की समस्याओं को सुनने के लिए नारायणबगड़ में ही रुकना पड़ा, जबकि वे स्वयं और डॉ. धन सिंह रावत पैदल ही डुंगरी गांव की ओर निकल पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चार से पाँच किलोमीटर की कठिन चढ़ाई और दुर्गम मार्ग के बावजूद स्वर्गीय मुन्नी देवी वहां पहले से मौजूद थीं। खराब स्वास्थ्य के बावजूद वे पीड़ित ग्रामीणों के बीच खड़ी थीं। धामी ने याद किया कि उनके बार-बार मना करने के बावजूद मुन्नी देवी उन्हें रिसीव करने के लिए आधे रास्ते तक आ गई थीं। यह उनका जनता के प्रति समर्पण और संवेदनशीलता दर्शाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में जब वे धराली क्षेत्र में आपदा प्रभावितों के बीच थे, तभी उन्हें मुन्नी देवी के निधन की सूचना मिली। कुछ दिन पहले ही वे अस्पताल में उनसे मिलने गए थे। उस समय उनके चेहरे पर कमजोरी तो साफ झलक रही थी, लेकिन उनकी आंखों में अद्भुत शांति और तेज था। वे तब भी अपने क्षेत्र के विकास और जनता की भलाई को लेकर चिंतनशील थीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुन्नी देवी का राजनीतिक जीवन बेहद प्रेरणादायक रहा। वह पहले जिला पंचायत अध्यक्ष चमोली रहीं और उसके बाद थराली से विधायक बनीं। उन्होंने राजनीति को केवल सत्ता का साधन न मानकर समाजसेवा का माध्यम बनाया। महिलाओं के उत्थान, ग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए।
धामी ने कहा, “मुन्नी देवी हमेशा जनता से सीधे संवाद करती थीं। उनकी सादगी और समर्पण उन्हें जनता के और करीब ले जाते थे। उनके निधन से राजनीति में जो खालीपन आया है, उसे भर पाना असंभव है।”
सदन का यह क्षण गहन संवेदनाओं से भरा रहा। श्रद्धांजलि के दौरान उपस्थित विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने भी उनकी जनसेवा और संघर्षशील व्यक्तित्व को याद किया।