• August 31, 2025

Panchayati Raj Meeting: उत्तराखंड में पंचायतों के समग्र विकास की रूपरेखा तय, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिए बड़े निर्देश

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देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में पंचायतीराज विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान राज्य में पंचायत व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई अहम निर्देश जारी किए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नव-निर्वाचित ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और जिला पंचायत सदस्यों को आधुनिक तकनीकों, वित्तीय प्रबंधन और शासन प्रणाली पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि वे बेहतर तरीके से ग्रामीण विकास की योजनाओं को कार्यान्वित कर सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” के विजन को साकार करने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब गांव मजबूत होंगे तभी प्रदेश और देश समृद्ध बन पाएंगे। इसी दिशा में सोचते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य में एकीकृत पंचायत भवनों के निर्माण का निर्देश दिया। इन भवनों में ग्राम पंचायत विकास अधिकारी, पटवारी, आशा वर्कर आदि सभी विभागों के प्रतिनिधि एक ही स्थान पर कार्य करेंगे, जिससे ग्रामीणों को एक छत के नीचे समस्त सेवाएं मिल सकेंगी। इन विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के लिए एक व्यवस्थित रोस्टर प्रणाली भी बनाई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने पंचायतों के बजट नियोजन को और अधिक सक्षम एवं प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत का सुनियोजित विकास सुनिश्चित किया जाए और किसी भी गांव को योजनाओं से वंचित न रखा जाए। साथ ही उन्होंने पंचायतीराज विभाग को निर्देश दिए कि आगामी 15 वर्षों में कितने ग्रामीण क्षेत्र शहरी क्षेत्र में तब्दील हो सकते हैं, इसका आकलन कर एक समग्र रिपोर्ट तैयार की जाए। यह रिपोर्ट राज्य की दीर्घकालिक विकास रणनीति का आधार बनेगी।

बैठक में मुख्यमंत्री ने एक अन्य अभिनव पहल की भी घोषणा की—ग्राम सभाओं के स्थापना दिवस को उत्सव के रूप में मनाना। उन्होंने कहा कि इसके लिए ग्रामवासियों से संवाद कर नियमित कैलेंडर तैयार किया जाए। यह आयोजन ग्राम स्तर पर होने वाले मेलों, प्रबुद्धजनों की जयंती या विशेष अवसरों के साथ भी मनाया जा सकता है, जिससे सामाजिक एकता और भागीदारी को बल मिलेगा।

मुख्यमंत्री धामी ने क्षेत्र और जिला पंचायतों में समेकित व संतुलित विकास पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी क्षेत्र या व्यक्ति विकास योजनाओं से वंचित न रह जाए। इसके लिए ई-गवर्नेंस को पंचायत स्तर तक विस्तारित किया जाए, पंचायतों के सभी कार्यों की रीयल टाइम मॉनिटरिंग हो और प्रत्येक कार्य का ऑडिट कर उसे सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।

उन्होंने प्रत्येक पंचायत स्तर पर जनशिकायतों के निस्तारण के लिए समयबद्ध प्रणाली विकसित करने को भी आवश्यक बताया। इसके तहत शिकायत दर्ज करने से लेकर उसके समाधान तक की प्रक्रिया तय समय में पूरी की जाएगी और इसमें जनता की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

इस महत्वपूर्ण बैठक में अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव चंद्रेश कुमार यादव, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, निदेशक पंचायतीराज निधि यादव समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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