Success Story: प्रधानाचार्य से प्रेरणादायक किसान बनीं लता कांडपाल, मशरूम उत्पादन से ग्रामीण महिलाओं को बना रहीं आत्मनिर्भर

Success Story: प्रधानाचार्य से प्रेरणादायक किसान बनीं लता कांडपाल, मशरूम उत्पादन से ग्रामीण महिलाओं को बना रहीं आत्मनिर्भर
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के हवालबाग ब्लॉक के चितई पंत गांव की रहने वाली लता कांडपाल आज हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। एक समय में प्रतिष्ठित विद्यालय महर्षि विद्या मंदिर में करीब 15 वर्षों तक प्रधानाचार्य पद पर रहते हुए बच्चों को शिक्षित करने वाली लता कांडपाल ने जब खेती को अपनी नई पहचान बनाया, तो उन्होंने न सिर्फ खुद के लिए एक नया रास्ता चुना, बल्कि कई अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त किया।
शिक्षा के क्षेत्र में एक लंबा और सराहनीय कार्यकाल पूरा करने के बाद, लता कांडपाल ने देखा कि उनके क्षेत्र में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। खासतौर पर महिलाओं को रोजगार के सीमित अवसर ही मिल पा रहे थे। इसे देखते हुए उन्होंने पारंपरिक नौकरी को अलविदा कहने का साहसिक निर्णय लिया और स्वरोजगार को जीवन का नया मिशन बना लिया।
लता कांडपाल ने अपने घर पर एक बड़ा पॉलीहाउस स्थापित किया, जो आज उनके उद्यम का केंद्र बन चुका है। उनके इस नए सफर की शुरुआत हुई मशरूम उत्पादन से, जिसके लिए उन्होंने महिला हाट संस्था, अल्मोड़ा की सचिव कृष्णा बिष्ट से प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्ष 2020 में जब उन्होंने पहला बैच तैयार किया, तो उन्हें 25,000 रुपये का मुनाफा हुआ। यह उनके आत्मविश्वास और मेहनत का परिणाम था, जिससे उन्होंने साबित किया कि ग्रामीण क्षेत्र में रहकर भी सफल व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है।
लता ने सिर्फ खुद तक अपनी सफलता सीमित नहीं रखी। उन्होंने क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी मशरूम उत्पादन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनने की दिशा में प्रेरित किया। उनका मानना है कि जब तक महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी नहीं होंगी, तब तक ग्रामीण विकास अधूरा रहेगा।
आज, लता कांडपाल की पहचान एक सामाजिक उद्यमी, शिक्षिका और मार्गदर्शक के रूप में बन चुकी है। उनकी पहल ने साबित किया है कि अगर इरादा मजबूत हो और सोच सकारात्मक, तो किसी भी उम्र में बदलाव लाया जा सकता है। वह चाहती हैं कि उत्तराखंड के हर गांव की महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और परंपरागत कृषि से हटकर वैज्ञानिक और लाभदायक खेती की ओर कदम बढ़ाएं।
उनका यह प्रयास महिला सशक्तिकरण, ग्राम्य विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने का एक आदर्श उदाहरण बन चुका है। लता कांडपाल जैसे उदाहरण यह दिखाते हैं कि शिक्षा, सेवा और संकल्प जब साथ आते हैं, तो सामाजिक बदलाव की लहर जरूर उठती है।