Jharkhand Women Empowerment: झारखंड में दो दिवसीय कार्यशाला से ग्रामीण महिला सशक्तिकरण को मिली नई दिशा, 14 राज्यों के प्रतिनिधियों ने साझा किए अनुभव

Jharkhand Women Empowerment: झारखंड में दो दिवसीय कार्यशाला से ग्रामीण महिला सशक्तिकरण को मिली नई दिशा, 14 राज्यों के प्रतिनिधियों ने साझा किए अनुभव
रांची, 23 जुलाई — झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला ने ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और सामाजिक सशक्तिकरण को लेकर एक सशक्त मंच प्रदान किया। “संगठन, स्वास्थ्य, समृद्धि” विषय पर आधारित इस कार्यशाला का आयोजन भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। देशभर के 14 राज्यों से आए प्रतिभागियों, महिला समूहों और विकास अधिकारियों ने इस कार्यशाला में भाग लिया और अपने अनुभवों को साझा किया।
कार्यशाला का उद्घाटन झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं का स्वास्थ्य केवल सामाजिक स्थिति का संकेत नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक प्रगति का आईना भी है। उन्होंने बताया कि झारखंड सरकार ‘मंईयां सम्मान योजना’, ‘सर्वजन पेंशन योजना’, ‘फूलो-झानो आशीर्वाद योजना’, ‘मनरेगा’, ‘पोषण वाटिका’, ‘दीदी बाड़ी’, ‘अबुआ आवास’ और ‘बिरसा हरित ग्राम योजना’ जैसी योजनाओं के माध्यम से महिला सशक्तिकरण के लिए जमीनी स्तर पर ठोस कार्य कर रही है। इन योजनाओं को सखी मंडल और सेतु दीदियों के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे व्यापक प्रभाव दिखाई दे रहा है।
मंत्री ने कहा कि हेल्थ और न्यूट्रिशन के साथ-साथ अब मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल वेलबीइंग) पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि एक स्वस्थ नागरिक ही शिक्षित और आत्मनिर्भर समाज की नींव रख सकता है। उन्होंने बताया कि आज झारखंड में 32 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाएं संगठित होकर समाज में बदलाव की बुनियाद रख रही हैं। वे अब सिर्फ जागरूक नहीं हैं, बल्कि अपने गांवों में नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड की असली ताकत अब गांवों में संगठित होती महिलाएं हैं। इन महिलाओं की भागीदारी ने न केवल समाज में परिवर्तन की शुरुआत की है, बल्कि सरकार की योजनाओं को भी धरातल पर क्रियान्वित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कार्यक्रम में ग्रामीण विकास विभाग के सचिव के. श्रीनिवासन ने कहा कि महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण ही समृद्ध और विकसित समाज की नींव है। उन्होंने जानकारी दी कि फूलो-झानो आशीर्वाद योजना के अंतर्गत अब तक 36,000 महिलाओं को ब्याज मुक्त ऋण प्रदान किया गया है, जिससे वे अपने व्यवसाय और आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ‘जोहार परियोजना’ का दूसरा चरण जल्द प्रारंभ किया जाएगा। सचिव ने कहा कि यह कार्यशाला केवल विचार-विमर्श का माध्यम नहीं बल्कि एक प्रेरणादायक रोडमैप है, जिसे ज़मीन पर उतारने के लिए सभी विभाग मिलकर काम करेंगे। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि छोटे-छोटे सामुदायिक प्रयास ही बड़े सामाजिक परिवर्तन की नींव रखते हैं।
कार्यशाला में ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव स्मृति शरण ने कहा कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्यों के अनुभवों को साझा करना, उनका दस्तावेज़ीकरण करना और भविष्य के लिए ठोस रणनीति बनाना है। उन्होंने झारखंड में खाद्य, पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता के क्षेत्र में किए गए नवाचारों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आगामी वर्ष में ‘रूरल प्रॉस्पेरिटी एंड रेजिलिएंस प्रोग्राम‘ की शुरुआत की जा रही है, जिसमें एफएनएच (फूड, न्यूट्रिशन, हेल्थ) एक अहम घटक होगा।
कार्यशाला के पहले दिन प्रतिभागियों ने 14 जिलों में किए जा रहे जमीनी कार्यों का दौरा किया और उनके अनुभवों से लाभ उठाया। इस क्षेत्रीय भ्रमण के बाद विभिन्न राज्यों की एफएनएच कैडर महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए, जिनमें राजस्थान, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर और झारखंड शामिल रहे। झारखंड के खूंटी जिले की सेतु दीदी क्लेमेंसिया ओर्रा ने बताया कि वे अपने समूह के माध्यम से आंगनबाड़ी और आशा दीदियों के साथ मिलकर पोषण, आयरन-फोलिक एसिड टैबलेट, डीवॉर्मिंग और माहवारी स्वच्छता जैसे विषयों पर काम कर रही हैं।
कार्यक्रम में राज्य भर की उत्कृष्ट कार्य करने वाली सेतु दीदियों को मोमेंटो और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके प्रभावशाली कार्य और समुदाय के प्रति समर्पण को पहचान देने के उद्देश्य से प्रदान किया गया। कार्यशाला स्थल पर 14 राज्यों और झारखंड की ओर से अलग-अलग स्टॉल्स लगाए गए, जिनमें खाद्य, पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के क्षेत्र में किए गए नवाचारों और परियोजनाओं को प्रदर्शित किया गया। ग्रामीण विकास मंत्री ने सभी स्टॉल्स का दौरा किया और प्रतिभागियों से बातचीत कर उनके नवाचारों के बारे में जानकारी ली।
इस कार्यशाला में ग्रामीण विकास मंत्रालय की उप सचिव मोनिका, जेएसएलपीएस के सीईओ अनन्य मित्तल और कई अन्य गणमान्य अधिकारी उपस्थित रहे। दो दिवसीय यह आयोजन भविष्य में ग्रामीण भारत को स्वस्थ, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के लिए मील का पत्थर साबित होगा।