पिंक रिवोल्यूशन: हरिद्वार में ‘क्लाउड किचन’ से आत्मनिर्भरता की नई इबारत, घर के स्वाद से महिलाएं जीतेंगी बाजार-
पिंक रिवोल्यूशन: हरिद्वार में ‘क्लाउड किचन’ से आत्मनिर्भरता की नई इबारत, घर के स्वाद से महिलाएं जीतेंगी बाजार-
अहमद हसन
विशेष संवाददाता, हरिद्वार 29 दिसंबर, 2025
उत्तराखंड राज्य की रजत जयंती (25वीं वर्षगांठ) के अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार से महिला सशक्तिकरण की एक ऐसी तस्वीर उभरी है, जो पूरे प्रदेश के लिए नजीर बनने जा रही है। जनपद हरिद्वार अब उत्तराखंड का ऐसा पहला जिला बन गया है, जहां ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक ‘क्लाउड किचन’ तकनीक के जरिए उद्यमी (Entrepreneur) बनाने का बीड़ा उठाया गया है। सोमवार को मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्रा ने ग्रामीण व्यवसाय इन्क्यूबेटर सेंटर में इस महत्वाकांक्षी प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।

इंडस्ट्रियल हब की जरूरत और महिलाओं का हुनर
अक्सर देखा गया है कि सिडकुल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों को दोपहर के भोजन में घर जैसा स्वाद और शुद्धता नहीं मिल पाती। इसी ‘गैप’ को भरने के लिए सीडीओ ललित नारायण मिश्रा ने यह अनूठी पहल की है। उन्होंने प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए कहा, “हमारी मातृशक्ति खाना बनाने की कला में जन्मजात दक्ष है। अब समय है कि इस हुनर को आर्थिक मजबूती में बदला जाए। क्लाउड किचन एक ऐसा मॉडल है जिसमें महिलाएं अपने घर की रसोई से ही कम लागत में व्यवसाय शुरू कर सकती हैं।”

25वीं वर्षगांठ: 25 महिलाएं और नई उम्मीदें
राज्य स्थापना के 25 गौरवशाली वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में, प्रथम चरण में जनपद के विभिन्न महिला समूहों से 25 ऊर्जावान महिलाओं का चयन किया गया है। इन महिलाओं को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के सहयोग से मास्टर ट्रेनर रचित द्वारा प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण में खाना बनाने के साथ-साथ प्रोफेशनल पैकेजिंग, स्वच्छता मानकों और ऑनलाइन ऑर्डर मैनेजमेंट की जानकारी भी दी जा रही है।

प्रशासनिक कवच: लाइसेंस से लेकर बैंक लोन तक की राह आसान
प्रशासन केवल प्रशिक्षण देकर अपना पल्ला नहीं झाड़ रहा, बल्कि महिलाओं के व्यवसाय को धरातल पर उतारने के लिए ‘हैंड-होल्डिंग’ सपोर्ट भी दे रहा है:
लीगल सपोर्ट: प्रशिक्षण के दौरान ही सभी महिलाओं के ‘फूड लाइसेंस’ तैयार कराए जाएंगे ताकि उन्हें भविष्य में किसी तकनीकी बाधा का सामना न करना पड़े।

वित्तीय सहायता: एलडीएम दिनेश गुप्ता ने स्पष्ट किया कि ऋण (Loan) की प्रक्रिया को बेहद सरल बनाया गया है। जैसे ही महिलाएं प्रशिक्षण पूरा करेंगी, उन्हें अपना सेटअप लगाने के लिए प्राथमिकता के आधार पर लोन स्वीकृत किया जाएगा।
बाजार की उपलब्धता: सहायक परियोजना निदेशक नलिनीत घिल्डियाल ने बताया कि इन महिलाओं को सीधे कंपनियों और ऑफिसों से जोड़ने की योजना है, जिससे पहले दिन से ही उन्हें ऑर्डर्स मिल सकें।
बदलेगी ग्रामीण आर्थिकी की तस्वीर
इस कार्यक्रम में आजीविका मिशन के निदेशक शिव कुमार सिंह और जिला परियोजना प्रबंधक संजय सक्सेना ने भी अपने विचार साझा किए। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘क्लाउड किचन’ मॉडल से न केवल महिलाओं की आय बढ़ेगी, बल्कि वे अन्य स्थानीय महिलाओं को भी रोजगार दे सकेंगी। शुद्धता और गुणवत्ता को इस पूरे प्रोजेक्ट की रीढ़ माना जा रहा है।
अधिकारी का कथन: > “हरिद्वार में उद्योगों की भरमार है और घर के खाने की मांग भी बहुत ज्यादा है। क्लाउड किचन के माध्यम से हम महिलाओं को उनके घर की दहलीज के भीतर ही एक सफल बिज़नेस मॉडल दे रहे हैं। यह उत्तराखंड के ग्रामीण विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा।”
— ललित नारायण मिश्रा, सीडीओ, हरिद्वार
प्रमुख बिंदु जिन पर रहेगा फोकस:
विशेष पहलू विवरण
मॉडल क्लाउड किचन (बिना रेस्टोरेंट खोले घर से भोजन की सप्लाई)
लक्ष्य औद्योगिक कर्मचारियों को शुद्ध भोजन और महिलाओं को स्वावलंबन
प्रशिक्षण 25 महिलाओं का पहला बैच (25वीं वर्षगांठ के प्रतीक स्वरूप)
सुविधा फूड लाइसेंस और बैंक ऋण की तत्काल व्यवस्था