Desi Murgi Palan: गाजियाबाद की मंजू कश्यप बनीं महिलाओं के लिए मिसाल, देसी मुर्गी पालन से खड़ा किया सफल पोल्ट्री फॉर्म
Desi Murgi Palan: गाजियाबाद की मंजू कश्यप बनीं महिलाओं के लिए मिसाल, देसी मुर्गी पालन से खड़ा किया सफल पोल्ट्री फॉर्म
कहते हैं कि मेहनत, सही योजना और आत्मविश्वास हो तो कोई भी छोटा काम बड़ी सफलता में बदला जा सकता है। गाजियाबाद के दुहाई गांव की रहने वाली महिला किसान मंजू कश्यप ने इसे सच कर दिखाया है। उन्होंने देसी मुर्गी पालन से न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि अन्य महिलाओं और किसानों के लिए भी प्रेरणा बनकर उभरी हैं। महज छह महीने पहले 850 देसी चूजों से शुरू किया गया उनका छोटा सा पोल्ट्री फॉर्म आज तेजी से आगे बढ़ रहा है और स्थानीय बाजार में उनकी मजबूत पहचान बन चुकी है।
मंजू कश्यप पहले से मछली पालन, सिंघाड़ा फल और सब्जियों की खेती से जुड़ी हुई हैं। खेती और पशुपालन के अनुभव के आधार पर उन्होंने देसी मुर्गी पालन की शुरुआत की। शुरुआत में चुनौतियां जरूर आईं, लेकिन समय के साथ अनुभव बढ़ा और उत्पादन तथा गुणवत्ता में भी सुधार होता गया। आज उनके फार्म में बड़ी संख्या में देसी मुर्गे और मुर्गियां तैयार हैं, जिनसे रोजाना 200 से 250 देसी अंडों का उत्पादन हो रहा है।
मंजू बताती हैं कि देसी मुर्गी के अंडों की मांग लगातार बढ़ रही है। एक देसी अंडा 20 से 25 रुपये में आसानी से बिक जाता है, जबकि 30 अंडों का एक कैरेट 450 रुपये तक में बाजार में बिक रहा है। बेहतर स्वाद और शुद्धता के कारण गांवों के साथ-साथ शहरों में भी देसी अंडों की जबरदस्त मांग है। यही वजह है कि उनके फार्म से अंडों की सप्लाई लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि देसी अंडों की ऊंची कीमत का सबसे बड़ा कारण उनका औषधीय महत्व है। ग्रामीण मान्यताओं और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से देसी मुर्गी के अंडे को शरीर को ताकत देने वाला माना जाता है। यही कारण है कि लोग बॉयलर अंडों की तुलना में देसी अंडों को अधिक पसंद कर रहे हैं।
मंजू कश्यप का कहना है कि आज मुर्गी पालन केवल पुरुषों का काम नहीं रह गया है। महिलाएं भी इसे शौक के साथ-साथ अच्छे मुनाफे वाले व्यवसाय के रूप में अपना रही हैं। सही देखभाल, संतुलित आहार और साफ-सफाई से यह व्यवसाय कम लागत में अच्छी आमदनी दे सकता है। वे बताती हैं कि गांव हो या शहर, हर जगह देसी मुर्गी पालन का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है।
मंजू की मेहनत और सफलता की गूंज राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुकी है। हाल ही में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे मुलाकात की और उनके प्रयासों की सराहना की। यह मंजू के लिए गर्व का क्षण था और उनके आत्मविश्वास को और मजबूत करने वाला साबित हुआ।
आज मंजू कश्यप खेती और पशुपालन के जरिए अच्छी वार्षिक आय अर्जित कर रही हैं। उनका यह सफर साबित करता है कि सही सोच और मेहनत से ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वरोजगार के बड़े अवसर मौजूद हैं। देसी मुर्गी पालन के माध्यम से मंजू न केवल खुद आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अपने क्षेत्र के अन्य किसानों और महिलाओं को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही हैं।