• January 14, 2026

Mukhyamantri Swarozgar Yojana: मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड की मजबूत नींव, 3848 लाभार्थियों को 33.22 करोड़ की सहायता राशि वितरित

 Mukhyamantri Swarozgar Yojana: मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड की मजबूत नींव, 3848 लाभार्थियों को 33.22 करोड़ की सहायता राशि वितरित
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Mukhyamantri Swarozgar Yojana: मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड की मजबूत नींव, 3848 लाभार्थियों को 33.22 करोड़ की सहायता राशि वितरित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास से ऑनलाइन माध्यम के जरिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 3848 लाभार्थियों के बैंक खातों में 33.22 करोड़ रुपये की धनराशि का वितरण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि उत्तराखण्ड का युवा नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बने। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना इसी सोच का परिणाम है, जिसने राज्य में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के साथ-साथ पलायन को रोकने और रिवर्स माइग्रेशन को प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के बाद राज्य लौटे प्रवासी नागरिकों, युवा उद्यमियों, कारीगरों, हस्तशिल्पियों और शिक्षित बेरोजगारों के लिए यह योजना वरदान साबित हुई है। योजना के अंतर्गत राज्य के मूल और स्थायी निवासियों को विनिर्माण, सेवा और व्यापार क्षेत्र में राष्ट्रीयकृत, सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के माध्यम से ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। विनिर्माण इकाइयों के लिए 25 लाख रुपये तक और सेवा एवं व्यापार इकाइयों के लिए 10 लाख रुपये तक की परियोजना लागत की अनुमति दी गई है। इसके साथ ही परियोजना लागत का 15 से 25 प्रतिशत तक मार्जिन मनी सब्सिडी के रूप में प्रदान की जा रही है।

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मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि योजना के अंतर्गत लगभग 32 हजार लाभार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था, जबकि अब तक 35 हजार से अधिक लोग इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं। अब तक 1389 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण वितरित किया जा चुका है, जिससे लगभग 64,966 नए रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर प्रभावी रूप से कार्य कर रही है और राज्य की अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रही है।

मुख्यमंत्री ने इस योजना को छोटे व्यापारियों और आत्मनिर्भरता की दिशा में उत्तराखण्ड के लिए एक “गेम चेंजर योजना” बताया। उन्होंने कहा कि योजना की सफलता को देखते हुए वर्ष 2025 से मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 की शुरुआत की गई है, जिसमें मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और नैनो योजना का एकीकरण किया गया है। नई व्यवस्था के अंतर्गत सब्सिडी की सीमा 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत तक कर दी गई है। इसके साथ ही भौगोलिक, सामाजिक और उत्पाद बूस्टर की अवधारणा के तहत अतिरिक्त 5 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान भी किया गया है, जिससे यह योजना आर्थिक के साथ-साथ सामाजिक सशक्तिकरण का माध्यम बनेगी।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के तहत लाभार्थियों को सब्सिडी की राशि सीधे ऑनलाइन माध्यम से उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है। यह सरकार की पारदर्शी, टेक्नोलॉजी आधारित और भ्रष्टाचार मुक्त कार्यप्रणाली का स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड की मजबूत आधारशिला है। सरकार का लक्ष्य है कि हर जिले में स्थानीय उद्यम विकसित हों, हर गांव में रोजगार के अवसर पैदा हों और हर युवा को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिले।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने योजना के लाभार्थियों से संवाद भी किया। लोहाघाट, चंपावत के कमल सिंह पार्थोली ने बताया कि उन्होंने स्मार्ट लाइब्रेरी स्थापित करने के लिए 10 लाख रुपये का ऋण लिया, जहां वर्तमान में 130 छात्र अध्ययन कर रहे हैं और भविष्य में ई-लाइब्रेरी विकसित करने की योजना है। ऊधमसिंह नगर के प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने वाहन सर्विस के कार्य के लिए 10 लाख रुपये का ऋण लिया, जबकि पहले वे साइकिल रिपेयरिंग का कार्य करते थे। उत्तरकाशी के जसपाल ने बताया कि उन्होंने फिटनेस क्लब की स्थापना के लिए 10 लाख रुपये का ऋण लिया है और अब अपने व्यवसाय का विस्तार कर रहे हैं। पौड़ी गढ़वाल के अयान मंसूरी ने बताया कि उन्होंने रजाई और गद्दा निर्माण के लिए 10 लाख रुपये का ऋण लिया, जिससे कई लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है और इस वर्ष उनका कारोबार लगभग 3 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। बागेश्वर की चंपा देवी ने बताया कि उन्होंने मोबाइल सेल और सर्विस के लिए 7 लाख रुपये का ऋण लिया, जिससे उनकी आजीविका में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

कार्यक्रम में सचिव उद्योग विनय शंकर पांडेय, महानिदेशक उद्योग एवं प्रबंध निदेशक सिडकुल सौरभ गहरवार, उप सचिव शिव शंकर मिश्रा, अपर निदेशक मृत्युंजय सिंह, संयुक्त निदेशक अनुपम द्विवेदी, दीपक मुरारी, उप निदेशक महावीर सजवान, राजेंद्र कुमार, उद्योग मित्र अभिषेक नैनवाल और अनुराग गुप्ता सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।

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