WSDM 2025 Dehradun: विश्व आपदा प्रबंधन शिखर सम्मेलन WSDM 2025 और 20वां उत्तराखण्ड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन, देहरादून में वैज्ञानिक शोध और नवाचार का वैश्विक संगम
WSDM 2025 Dehradun: विश्व आपदा प्रबंधन शिखर सम्मेलन WSDM 2025 और 20वां उत्तराखण्ड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन, देहरादून में वैज्ञानिक शोध और नवाचार का वैश्विक संगम
देहरादून स्थित ग्राफिक एरा डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी में आज उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) द्वारा आयोजित विश्व आपदा प्रबंधन शिखर सम्मेलन (WSDM 2025) तथा 20वें उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (USSTC) के तहत एक ऐतिहासिक वैज्ञानिक मंच का आयोजन किया गया। इस आयोजन में देश-विदेश से आए विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लेकर इसे वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई।

दो दिवसीय आयोजन के तहत बीस से अधिक तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विभिन्न विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से आए 500 से अधिक शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इसके अतिरिक्त दस से अधिक विशेष एवं विशिष्ट सत्र भी आयोजित हुए, जिन्होंने आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार, तकनीकी उन्नति और सतत विकास के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान की।
सम्मेलन के दौरान बारह महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग, सतत वित्त पोषण, आपदा जोखिम वित्त, कार्बन ईकोसिस्टम, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, हिमालयी कॉरिडोर विकास, सिक्किम मॉडल, मीडिया की भूमिका और समुदाय-आधारित आपदा प्रबंधन प्रमुख रहे। विशेषज्ञों ने कहा कि विज्ञान और तकनीक का प्रभावी उपयोग भविष्य की आपदाओं से निपटने की क्षमता को मजबूत करेगा और विश्व को बेहतर सुरक्षा मॉडल प्रदान करेगा।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देना, नीति निर्माण में सहयोग सुनिश्चित करना, साक्ष्य-आधारित आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ करना और समाज के सभी वर्गों को सुरक्षित एवं सशक्त भविष्य की ओर अग्रसर करना था। कृषि, जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, पर्यावरण, सामाजिक विकास और जलवायु विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
आयोजन के दौरान वॉटर कॉन्क्लेव भी आयोजित किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने जलवायु, जल संसाधन और आपदा प्रबंधन के पारस्परिक संबंधों पर गहन विचार-विमर्श किया। प्रो. राजीव सिन्हा, डॉ. राघवन कृष्णन, प्रो. अनिल कुलकर्णी, डॉ. अरविंद कुमार और डॉ. राकेश ने ग्लेशियरों, जल शासन, नदियों में हो रहे बदलाव, अवैध रेत खनन और एकीकृत जल नीति जैसे संवेदनशील मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

उपाध्यक्ष राज्य स्तरीय वॉटरशेड परिषद शंकर कोरंगा और आईएएस डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने विज्ञान और प्रशासन के समन्वय को भविष्य की आवश्यकता बताया और कहा कि वैज्ञानिक शोध और सरकारी नीति का सहयोग ही विकास की दिशा तय करेगा। वहीं, ट्राइबल कम्यूनिटी के विकास और आपदा संवेदनशीलता से जुड़ा एक विशेष सत्र भी आयोजित किया गया।
आपदा प्रबंधन में मीडिया की भूमिका पर आयोजित विशेष सत्र में देश के प्रतिष्ठित पत्रकारों ने भाग लेकर आपदा संचार, तकनीकी रिपोर्टिंग, सटीक सूचना प्रसारण और जन-भागीदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने कहा कि मीडिया न केवल सूचना का माध्यम है, बल्कि आपदा समय में जीवन बचाने वाला प्रभावी साधन भी है।
इस ऐतिहासिक आयोजन ने वैज्ञानिक शोध, वैश्विक सहयोग, अभिनव तकनीक और नीति निर्माण को एक मंच प्रदान कर भविष्य के सुरक्षित और सशक्त भारत का नया मार्ग प्रशस्त किया।